
25 जुलाई 2025 को राजस्थान के झालावाड़ जिले के पीपलोदी गांव में एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की छत ढहने की दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे में कई बच्चों और शिक्षकों के हताहत होने की खबर ने स्थानीय समुदाय और देश भर में शोक की लहर दौड़ा दी। इस लेख में हम इस त्रासदी के विवरण, नेताओं और अधिकारियों के बयानों, और इस घटना के पीछे के संभावित कारणों पर प्रकाश डालेंगे।
घटना का विवरण
सुबह के समय, जब बच्चे और शिक्षक स्कूल परिसर में प्रार्थना सभा के लिए एकत्रित हो रहे थे, पीपलोदी प्राथमिक स्कूल की छत अचानक ढह गई। इस हादसे में कम से कम 3-4 बच्चों की मृत्यु हो गई, और कई अन्य घायल हो गए। घायलों को तुरंत मनोहर थाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। बचाव कार्य में जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, और जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुदानिया तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे।
नेताओं के बयान
इस त्रासदी पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने अपने बयान में कहा, “झालावाड़ के पीपलोदी में विद्यालय की छत गिरने से हुआ दर्दनाक हादसा अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक है। घायल बच्चों के समुचित उपचार सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले में त्वरित कार्रवाई करेगी और घायलों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस घटना पर शोक जताया और ट्वीट किया, “मनोहरथाना, झालावाड़ में सरकारी स्कूल भवन के ढहने से कई बच्चों और शिक्षकों के हताहत होने की खबर आ रही है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि इस हादसे में कम से कम जानमाल का नुकसान हो और घायल जल्द स्वस्थ हों।”
विपक्षी नेता प्रताप खाचरियावास ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “इस हादसे की जिम्मेदारी सरकार पर है। मृतक बच्चों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देना चाहिए।” उनका यह बयान इस घटना को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाता है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुदानिया ने घटनास्थल का दौरा किया और जानकारी दी कि बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में भवन की जर्जर स्थिति इस हादसे का प्रमुख कारण प्रतीत हो रही है। जिला प्रशासन ने इस मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं, ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।
स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने प्रशासन की लापरवाही को इस हादसे का कारण बताया है। उनका कहना है कि स्कूल भवन की मरम्मत और रखरखाव की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
संभावित कारण और भविष्य के कदम
यह हादसा सरकारी स्कूलों की बुनियादी ढांचागत कमियों को उजागर करता है। पुराने और जर्जर भवनों में पढ़ाई कर रहे बच्चों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि राज्य सरकार के सामने भी कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल भवनों का नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत इस तरह की त्रासदियों को रोक सकती है।
इस घटना के बाद सरकार ने जांच के आदेश तो दिए हैं, लेकिन यह जरूरी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। स्कूलों के लिए बजट आवंटन में वृद्धि, नियमित सुरक्षा ऑडिट, और त्वरित मरम्मत कार्य इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
निष्कर्ष
झालावाड़ के पीपलोदी में हुई यह त्रासदी न केवल एक दुखद घटना है, बल्कि यह हमारी शिक्षा प्रणाली और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की कमियों को भी दर्शाती है। नेताओं और अधिकारियों के बयानों से यह स्पष्ट है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है, लेकिन अब समय है कि बयानों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई की जाए। बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इस दिशा में तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।